
🚨 BREAKING NEWS | बदायूं के दातागंज थाने में युवक की मौत से हड़कंप, परिजनों ने लगाया पुलिस पिटाई का गंभीर आरोप
⚠️ हवालात के गेट पर बेसुध पड़ा था राजेश, पुलिसकर्मी पानी पिलाते दिखे; अस्पताल पहुंचने पर मौत | पुलिस का दावा—शांतिभंग में किया गया था निरुद्ध, पोस्टमार्टम से खुलेगा मौत का राज
बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के दातागंज थाना क्षेत्र से पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। अटसेना गांव में विवाद के बाद पुलिस द्वारा थाने लाए गए राजेश पुत्र शहजादे की हालत थाने में बिगड़ गई। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में मृतक के परिजनों ने पुलिस पर हिरासत में मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है।
मामले से जुड़ी सामने आई तस्वीर/वीडियो में राजेश को थाने की हवालात के गेट के पास बेहद खराब हालत में जमीन पर पड़ा देखा जा रहा है। दो पुलिसकर्मियों द्वारा उसे पानी पिलाने का प्रयास किए जाने और एक अन्य व्यक्ति द्वारा कपड़े से हवा करने की बात भी सामने आई है। इन दृश्यों ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔴 आखिर थाने में क्या हुआ?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अटसेना गांव में एक भंडारे के दौरान डीजे पर गाना बजाने को लेकर दो पक्षों में विवाद और मारपीट हुई थी। इसी मामले में पुलिस दोनों पक्षों से कुछ लोगों को थाने लेकर आई थी। पुलिस के अनुसार राजेश के खिलाफ शांतिभंग के आरोप में कार्रवाई की गई थी।
परिजनों का आरोप है कि दूसरे पक्ष के व्यक्ति को छोड़ दिया गया, जबकि राजेश को थाने में रखा गया और इसी दौरान उसके साथ मारपीट की गई। परिवार ने पुलिसकर्मियों पर डंडों से पीटने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
🏥 हालत बिगड़ी तो अस्पताल ले गई पुलिस, इलाज के दौरान मौत
पुलिस के अनुसार शुक्रवार शाम करीब चार बजे राजेश की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे पहले दातागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
⚖️ मौत की असली वजह क्या? पोस्टमार्टम पर टिकी नजर
मौत के कारण को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। रिपोर्टों के अनुसार पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया/कराया जा रहा था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था। एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से हृदय गति रुकने की बात भी सामने आई है, लेकिन हिरासत के दौरान हुई घटनाओं और परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र जांच बेहद महत्वपूर्ण है।
❓ पुलिस हिरासत में मौत ने खड़े किए कई बड़े सवाल
राजेश की मौत के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि थाने में उसकी हालत आखिर इतनी गंभीर कैसे हुई? यदि उसे केवल शांतिभंग के मामले में निरुद्ध किया गया था, तो उसकी चिकित्सकीय स्थिति की निगरानी कैसे की गई? हवालात के अंदर और बाहर लगे CCTV कैमरों की पूरी फुटेज क्या बताती है? उसे थाने लाने से लेकर अस्पताल पहुंचाने तक की पूरी टाइमलाइन क्या थी? और सबसे महत्वपूर्ण—परिजनों द्वारा लगाए गए हिरासत में मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी?
🔎 CCTV और मेडिकल रिकॉर्ड से सामने आ सकता है सच
पूरे मामले में थाने के CCTV फुटेज, पुलिस की जीडी/रोजनामचा प्रविष्टियां, मेडिकल परीक्षण के रिकॉर्ड, अस्पताल की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साक्ष्य साबित हो सकते हैं। इन्हीं दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच के आधार पर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि राजेश की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
यह मामला केवल एक युवक की मौत का नहीं, बल्कि पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति की सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है, ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या कानून का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय हो और यदि आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो उसकी भी स्पष्ट जानकारी सामने आए।
हलचल इंडिया न्यूज़ का सवाल सीधा है—राजेश की मौत की पूरी सच्चाई कब सामने आएगी?
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✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
📰 संपादक: वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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